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5 ऐसे मौकें जब दूसरों के खातिर दिग्गजों ने दांव पर लगा दिया अपना करियर

क्रिकेट के खेल में अपनी टीम को जीत दिलाने के साथ-साथ खिलाड़ी व्यक्तिगत प्रदर्शन को भी ध्यान रखता हैं हालाँकि क्रिकेट में ऐसे कई क्षण देखने मिले हैं जब खिलाडियों ने सहानुभूति, बलिदान और निःस्वार्थता की सच्चा उदाहरण पेश करते हुए सभी क्रिकेट फैन्स का दिल जीता हैं. आज इस लेख में ऐसे 5 किस्सों के बारे में पड़ेगे.

1) गौतम गंभीर ने विराट कोहली को दिया अपना मैन ऑफ द मैच अवार्ड

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भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने अपना मैन ऑफ द मैच अवार्ड युवा विराट कोहली को देकर सभी का दिल जीता था. वर्ष 2009 में श्रीलंका के विरुद्ध ईडन गार्डन में खेले गए मुकाबले में 315 रनों का लक्ष्य को हासिल करने के लिए गंभीर और कोहली ने बीच 224 रनों की यादगार साझेदारी हुई थी.

इस मैच में विराट कोहली ने 107 रन बनाये थे जबकि गंभीर 150 रनों पर नाबाद रहे थे और उन्हें मैन ऑफ द मैच दिया था लेकिन गंभीर ने युवा कोहली का मनोबल बढाने के लिए उन्हें अपनी ट्रॉफी दे दी थी.

2) रिचर्ड हेडली ने नहीं ली एक पारी में 10 विकेट

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रिचर्ड हेडली ने ब्रिसबेन में 9/52 का यादगार स्पेल डाला था और इस मैच में वह 10वीं विकेट ले सकते थे और जिम लेकर के बाद एक पारी में 10 विकेट लेने का कारनामा कर सकते थे लेकिन उन्होंने निस्वार्थ टीम के लिए अपना व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं देखा.

मैच में साथी खिलाड़ी वॉन ब्राउन ने 9वीं विकेट ली थी हालाँकि इस विकेट में हेडली का योगदान शायद गेंदबाज से भी ज्यादा था उन्होंने की तरह तेजी से दौड़कर ये यादगार पकड़ी थी और अपने 10 विकेट लेने का रिकॉर्ड दांव पर लगा दिया था.

3) जवागल श्रीनाथ ने दिया कुंबले को 10 विकेट लेने का मौका

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दिग्गज स्पिनर अनिल कुंबले ने दिल्ली के फ़िरोज़ शाह कोटला मैदान पर पाकिस्तान के विरुद्ध 9 विकेट ले लिए थे. इस तरह से कुंबले गेंदबाजी कर रहे थे जबकि दूसरी तरह से जवागल श्रीनाथ और पाकिस्तानी बल्लेबाज वकार युनिस अपनी विकेट गवाने के लिए बेताब दिखाई दे रहे लेकिन श्रीनाथ ने ऑफ साइड में बाहर की तरह गेंदबाजी करके वकार को किसी भी तरह का गलती करने का मौका नहीं दिया.

अनिल कुंबले ने जिसके बाद वसीम अकरम को शोर्ट लेग पर खड़े फील्डर के हाथों कैच कराके 10 विकेट लेने का एतिहासिक कारनामा किया.

4) रोहित के 264 रनों में उथप्पा का योगदान

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श्रीलंका के विरुद्ध 2014 में खेली गयी वनडे सीरीज रॉबिन उथप्पा और साहा के कमबैक सीरीज थी. दोनों ही खिलाडी एक बड़ी पारी खेलकर टीम में अपनी जगह बनाने के लिए बेताब थे. सीरीज के पहले 3 मैचों में साहा को मौका दिया गया जबकि फाइनल दो मैचों में उथप्पा प्लेइंग इलेवन में जगह बनाने में सफल रहे.

मैच में उथप्पा जब बल्लेबाजी करने आये उस समय भारत का स्कोर 276/04 था और रोहित 155 रनों पर नाबाद थे जबकि 9 ओवर बाकि थे. इस दौरान उथप्पा ने सिर्फ 16 गेंदे खेली जबकि रोहित ने अंतिम 54 गेंदों में से 43 गेंदे खेलकर 91 रन बनाकर एक वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. मैच में अगर उथप्पा सक्रिफाइस नहीं करते तो रोहित ये रिकॉर्ड हासिल नहीं कर पाते.

5) वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में बिना आउट दिए पवेलियन लौटे एडम गिलक्रिस्ट

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ऑस्ट्रेलिया के एडम गिलक्रिस्ट यकीनन दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपर बल्लेबाजों में से एक रहे हैं. उनकी आक्रामक पारियों और अद्भुत कीपिंग के कारण ऑस्ट्रेलिया ने कई यादगार जीत दर्ज की हैं. अच्छे क्रिकेटर होने के साथ-साथ गिलक्रिस्ट एक अच्छे और ईमानदार खिलाड़ी भी रहे हैं.

श्रीलंका के विरुद्ध वर्ल्ड कप सेमीफाइनल जैसे महत्वपूर्ण मैच में ऑस्ट्रेलिया के स्कोर 5 ओवर में 34 रन था. जिसके बाद गिलक्रिस्ट ने अरविन्द डी सिल्वा की गेंद पर स्वीप शॉट खेलने का प्रयास किया और गेंद उनके बल्ले का एज लेकर गयी लेकिन अंपायर इसे उन नहीं पाए लेकिन गिलक्रिस्ट बिना अंपायर के आउट दिए पवेलियन लौट गए.  
 

  

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