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भारत के विरुद्ध 3 वनडे मैचो में 3 शतक लगाकर सुर्ख़ियों में आये सलामी बल्लेबाज़ नासिर जमशेद  पाकिस्तान सुपर लीग 2016-17 में स्पॉट फिक्सिंग मामले में दोषी पाए गए है जिसके बाद पीसीबी की भ्रष्टाचार ट्रिब्यूनल ने उन्हें 10 वर्षो के लिए निलम्बित कर दिया हैं. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने शुक्रवार(17 अगस्त) को इस खबर की पुष्ठी की हैं.

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तीन व्यक्तियों के ट्रिब्यूनल ने फैसला किया कि उपरोक्त अवधि के दौरान क्रिकेटर को किसी भी प्रकार के क्रिकेट खेलने से प्रतिबंधित करने के साथ-साथ, एक खिलाड़ी जिसने भ्रष्टाचार विरोधी भ्रष्टाचार का उल्लंघन किया है, उसे जीवनभर के लिए पाकिस्तान क्रिकेट से सम्बंधित किसी भी प्रबंधन पदों को रखने से अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए.

इससे पहले दिसंबर में, भ्रष्टाचार विरोधी ट्रिब्यूनल ने जमशेद को बोर्ड द्वारा एक वर्ष के लिए निलंबित कर दिया गया था, उन्होंने वह स्पॉट फिक्सिंग मामले की जांच में अपना सहयोग नहीं दे रहे थे.

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इस साल अप्रैल में उन पर एक साल का प्रतिबंध समाप्त होने के बाद, बोर्ड ने उन्हें भ्रष्टाचार विरोधी कोड के सात उल्लंघन का दोषी करार दिया था, हालाँकि जमशेद ने उनके खिलाफ सभी आरोपों को खारिज कर जवाब दिया था. नतीजतन, पीसीबी ने एक बयान दर्ज किया, जिसमें कहा गया कि अध्यक्ष नजम सेठी ने तीन सदस्यीय भ्रष्टाचार विरोधी ट्रिब्यूनल के सामने यह मामला उठाया था, जिसमें रिटायर्ड जज फजल-ए-मिरान चौहान, शाहजीब मसूद , सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील और पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज अकीब जावेद शामिल थे.

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पीसीबी ने अनुसार जमशेद ने स्पॉट फिक्सिंग कांड में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी क्योंकि उन्होंने स्पॉट फिक्सिंग के लिए सट्टेबाजों की तरफ से खिलाड़ियों राज़ी किया था. पीसीबी के वकील तफज़ुल रिज़वी ने लाहौर में पीसीबी मुख्यालय के बाहर संवाददाताओं से कहा, “कुछ ऐसे मामले हैं जो आपको जीतने के बावजूद आपको खुश नहीं करते हैं. यह एक ऐसा है, क्योंकि खिलाड़ी ने स्पॉट फिक्सिंग मामले की रिपोर्ट करने में विफलता के कारण अपना करियर नष्ट कर दिया है.”