एजबेस्टन टेस्ट में ख़राब बल्लेबाजी प्रदर्शन के बाद लॉर्ड्स टेस्ट में प्लेइंग इलेवन में बदलाव संभव माना जा रहा था. पहले मैच में टीम इंडिया के गेंदबाज़ो ने शानदार प्रदर्शन किया था और जीत की नीव रखी थी, लेकिन बल्लेबाजों के लचर प्रदर्शन के कारण टीम इंडिया 194 रनों का लक्ष्य तक हासिल नहीं कर पाई थी. मैच के दौरान विराट कोहली के आलावा सभी बल्लेबाजों ने बेहद ही ख़राब स्तर की बल्लेबाज़ी की थी.

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टीम इंडिया के सभी बल्लेबाजों ने ख़राब बल्लेबाज़ी की थी. जिसके कारण कप्तान के सामने समस्या ये थी कि किसे टीम से बाहर किया जाए. मुरली विजय, शिखर धवन, केएल राहुल और अजिंक्य रहाणे और ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या सभी ने ख़राब बल्लेबाज़ी की थी. लेकिन टीम मैनेजमेंट ने अन्य चार को छोड़कर शिखर धवन को ड्राप करने का फ़ैसला किया. धवन ने एजबेस्टन टेस्ट की पारी पारी में 26 और दूसरी पारी में 13 रनों की पारी खेली. लेकिन उन्हें ख़राब ओवरसीज रिकॉर्ड के कारण टीम से बाहर कर दिया गया.

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लेकिन कप्तान विराट कोहली और टीम मैनेजमेंट का यह फ़ैसला सुनील गावस्कर को पसंद नहीं आ रहा हैं. पूर्व दिग्गज बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर का कहना है कि दिल्ली के सलामी बल्लेबाज़ शिखर धवन को बलि का बकरा बनाया गया हैं. उनका कहना है कि धवन को ड्राप करने का फ़ैसला सही नहीं हैं.

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सोनी टेन 3 पर बातचीत के दौरान सुनील गावस्कर ने कहा, “मैं धवन को ड्राप करने के फैसले से सहमत नहीं हूँ. शिखर धवन हमेशा बलि का बकरा बनते हैं. पिछले मैच में उन्होंने मुरली विजय से ज्यादा रन बनाये थे. प्रत्येक मैच के बाद उन्हें ड्राप करना सही नहीं हैं. अगर आप उसे प्रत्येक मैच के बाद ड्राप करते है तो उन्हें दौरे पर क्यों लेकर जाते हो?.”

दूसरे मैच में विराट कोहली ने शिखर धवन और उमेश यादव को टीम से बाहर करके उनके स्थान पर चेतेश्वर पुजारा और कुलदीप यादव को मौका दिया हैं.