सौरव गांगुली हमेशा से युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करके उन्हें मैच विनर बनाने के लिए जाने जाते रहे हैं. सौरव गांगुली ने अपने कप्तानी करियर के दौरान देश को कई होनहार और बड़े मैच विनर खिलाडी दिए. जिसमे एक प्रमुख खिलाड़ी एमएस धोनी हैं.

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धोनी एक छोटे से शहर रांची से आते है, जो कि भारत का वह हिस्सा है जिसने कभी राष्ट्रीय क्रिकेट खिलाड़ी नहीं दिया था, लेकिन धोनी न सिर्फ राष्ट्रीय टीम के लिए खेला बल्कि करीब दशक तक देश का कप्तान भी रहे. दुनिया क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल विकेटकीपर बल्लेबाजों में शुमार हैं. हालाँकि वह शुरूआती करियर के दौरान नंबर 7 पर बल्लेबाज़ी करते थे. जिस दौरान तत्कालीन कप्तान गांगुली ने उन्हें नंबर 3 पर बल्लेबाजी का मौका दिया. जिसके बाद उन्होंने पाकिस्तान के विरुद्ध 148 रनों की पारी खेली और वह रातों रात स्टार बन गए.

सौरव गांगुली ने ब्रेकफ़ास्ट विद चैंपियंस में बताया, “2004 में जब धोनी टीम में आये, जब वह शुरुआती दो मैच नंबर 7 पर खेले थे. हम वाइजैक में पाकिस्तान के विरुद्ध खेल रहे थे टीम घोषित हो चुकी थी और टीम मीटिंग में भी धोनी नंबर 7 पर थे.”

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“मैं अपने कमरे में बैठकर समाचार देख रहा था और सोच रहा था कि उसे कैसे (धोनी) को बड़ा खिलाड़ी बनाना है, मुझे पता था कि उसके पास बहुत प्रतिभा थीं.”

आगे गांगुली ने कहा, “मैच के दौरान वह शॉर्ट्स में बैठा था क्योंकि उसे पता था कि उसे 7 पर बल्लेबाजी करनी थी, मैंने उससे कहा कि एमएस आपको नंबर 3 पर बल्लेबाजी करना है,  उसने कहा आपका क्या होगा?  मैंने कहा कि मैं 4 पर और तू 3 पर खेलेंगा. उन्होंने 170 रन बनाए (एमएस धोनी ने खेल में 148 रन बनाए). मुझे लगता है कि आप खिलाड़ियों को कैसे बड़ा बना सकते हैं.  मुझे लगता है कि आप किसी को खिलाड़ी को नीचे धकेलकर(कम मौके देना) सुधार नहीं सकते हैं. आपको खिलाड़ी को क्षमता जानने के लिए उन्हें ज्यादा से ज्यादा मौके देने होते हैं.”

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धोनी को नंबर 3 पर भेजने के फैसले से धोनी का करियर तो चल निकला लेकिन उनका खुद का करियर बर्बाद हो गया. नंबर 4 पर गांगुली ने अच्छी बल्लेबाज़ी नहीं की. जिसके बाद राहुल द्रविड़ की कप्तानी में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया और उनका करियर बर्बाद हो गया.

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