सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर आज किसी सेलिब्रेटी से कम नहीं हैं. अर्जुन ने 17 जुलाई श्रीलंका अंडर 19 के विरुद्ध यूथ क्रिकेट में डेब्यू किया. अर्जुन ने कोलंबो में ‘नोनडिस्क्रीप्ट्स क्रिकेट क्लब में अपना पहला अंडर 19 मैच खेला. इस मैच की पहली पारी में अर्जुन ने 11 ओवरों की गेंदबाज़ी में 33 रन देकर एक विकेट लिया.

मैच में अर्जुन ने श्रीलंका के सलामी बल्लेबाज़ कामिल मिशरा के रूप में अपना पहला विकेट लिया.   जिसके बाद वह सोशल मीडिया पर छा गए. मैच में अर्जुन के आलावा अन्य दो गेंदबाज़ आयुष बदोनी और हर्ष त्यागी ने 4-4 विकेट लिया, लेकिन मैच में आकर्षण का केंद्र अर्जुन तेंदुलकर ही रहे.

मैच आयुष बदोनी ने अपने शानदार ऑलराउंडर से टीम की जीत में सबसे अहम योगदान दिया. आयुष ने श्रीलंका की पहली पारी 4 जबकि दूसरी पारी में 2 विकेट लिये. इसके आलावा आयुष ने बल्लेबाज़ी में भी नंबर 7 पर बल्लेबाज़ी करते हुए नाबाद 185 रनों की ऐतिहासिक पारी खेली.

आयुष के आलावा हर्ष त्यागी ने भी श्रीलंका अंडर 19 की पहली पारी में 4 बल्लेबाजों को शिकार बनाया था. लेकिन दुःख वाली बात यह रही कि टीम की जीत के बाद सारा श्रेय और चर्चा का विषय सिर्फ अर्जुन तेंदुलकर भी बना रहे. अर्जुन के 1 विकेट के कारण क्रिकेट फैन्स और कई क्रिकेट दिग्गजों ने उन्हें लगातार बधाई भेजी गई, दूसरी ओर टीम के अन्य खिलाड़ियों के प्रदर्शन और कड़ी मेहनत पर किसी का ध्यान ही नहीं गया. ये कही न कही एक ऐसे चीज़ है, जिससे युवा खिलाड़ियों के मनोबल में गिरवाट आ सकती हैं.

क्रिकेट क्रिकेट पसंद करने वाले फैन्स और एक्सपर्ट को अर्जुन तेंदुलकर को सचिन तेंदुलकर के बेटे की तरह नहीं बल्कि एक साधारण क्रिकेट की तरह देखना चाहिए, और उनके प्रदर्शन के आधार पर उनका मूल्यांकन करना चाहिए न कि सचिन तेंदुलकर के बेटे के आधार पर, इससे अन्य युवा खिलाड़ियों के साथ नइंसाफी होती हैं.