38 वर्षीय दिग्गज तेज गेंदबाज़ आशीष नेहरा ने दिल्ली के फ़िरोज़ शाह कोटला मैदान पर न्यूज़ीलैण्ड के विरुद्ध खेले गए पहले टी-ट्वेंटी से अंतराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा. नेहरा के संन्यास के बाद से उन्हें लगातार शुभकामनाएं संदेश मिल रहे हैं.

नेहरा के संन्यास के बाद दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह ने भी एक भावुक कर देने वाला बयान दिया हैं. युवराज ने फेसबुक पोस्ट में नेहरा को ‘सच्चा दोस्त’ और प्रेरणास्रोत्र बताते हुए उनसे जुडी हुई कुछ पुरानी यादें शेयर की.

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युवराज ने अपने फेसबुक अकाउंट वॉल पर लिखा, “वो(नेहरा) दिल का बहुत साफ़ इंसान हैं. किसी भी सेलिब्रेटीज को आंकने के लिए कई तरह के मापदंड होते है, लेकिन आशु(नेहरा) बेबाक(बिना किसी डर के) सच बोलता थे और कई बार उन्हें इसका नुकसान भी भुगतना पड़ा. मेरे लिए वह हमेशा आशु या नेहरा जी ही रहेगा, जोकि काफ़ी दिलचस्प, इमानदार और टीम भावना से युक्त इंसान हैं. मैं नेहरा को पहली बार अंडर-19 के दौरान मिला था, जब उनका चयन भारतीय टीम में हुआ था. वह हरभजन सिंह का रूममेट था. इस दौरान मैं हरभजन सिंह से मिलने गया जब मैंने नेहरा को पहली बार देखा. नेहरा एक जगह चुपचाप नहीं बैठ सकता था. वह हमेशा कुछ न कुछ करता रहता था. बाद में मैं नेहरा के साथ खेला और मुझे उसे करीब से जानने का मौका मिला.”

युवराज सिंह ने बताया, कि वह सोचते थे, कि नेहरा 38 वर्ष की उम्र में लगातार चोटों के बावजूद इतनी तेज गेंदबाजी कर सकते है, तो मैं 36 वर्ष की उम्र में बल्लेबाज़ी क्यों नहीं कर सकता हूँ. नेहरा से मुझे प्रेरणा मिलती हैं. युवराज सिंह ने यह भी लिखा,कि वह बिल्कुल भी बनावटी नहीं है, जिसका कई बार उन्हें खामियाज़ा भुगतना पड़ा हैं.

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युवराज सिंह ने लिखा, “आशु के 11 ओपरेशन हो चुके है, लेकिन नेहरा ने अपनी मेहनत और भारत के लिए खेलने के जज़्बे के कारण वापसी की. विश्वकप 2003 के दौरान उनका टखना काफ़ी बुरी तरह से मुड गया था. जिसके बाद वह इंग्लैंड के विरुद्ध अगला मैच खेलने की स्तिथि में नहीं थे, लेकिन नेहरा ने कहा, कि वह खेलना चाहते है. मैच से पहले पिछले 72 घंटो में नेहरा ने 30-40 बार अपने टखने पर बर्फ की मालिश कराई और पेनकिलर खाएं. जिसके बाद नेहरा ने इंग्लैंड के विरुद्ध महज 23 रन देकर 6 विकेट लिये और भारत ने इंग्लैंड को 82 रनों से हराया.”

“विश्वकप 2011 के सेमी-फाइनल में आशीष नेहरा ने पाकिस्तान के विरुद्ध शानदार गेंदबाजी की थी, हालाँकि गेंदबाजी के दौरान नेहरा चोटिल हो गए थे, जिस कारण वह श्रीलंका के विरुद्ध फाइनल नहीं खेल पायें थे. मैं यह जानता है, कि इस तरह की स्तिथि में कई खिलाड़ी निराश और रोने लगते है, लेकिन वह हमेशा हँसता रहता था और हमेशा दुसरो की मदद के लिए तैयार रहता. मुंबई के वानखेड़े में श्रीलंका के विरुद्ध वह ड्रिंक, टावेल का इंतजाम करता. टीम से बाहर वालों को यह शायद जरूरी बात नहीं लगेगी लेकिन टीम खेल में जब सीनियर खिलाड़ी इस तरह मदद करता है, तो बहुत अच्छा लगता है. मेरे लिये यह भावुक क्षण है, और उसके तथा उसके परिवार वालों के लिये भी. मैं क्रिकेट का आभरी हूँ, कि मुझे नेहरा जैसा सच्चा दोस्त दिया.”