भारतीय क्रिकेट इतिहास में एमएस धोनी का नाम हमेशा याद किया जाएगा. पूर्व भारतीय कप्तान धोनी ने बतौर कप्तान और बल्लेबाज़ी भारतीय टीम के लिए कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं. धोनी विश्व के एकलौते कप्तान है, जिसने आईसीसी द्वारा आयोजित सभी ट्राफी जीती हैं.

एमएस धोनी का क्रिकेट के प्रति नि:स्वार्थ समर्पण भी बेहद प्रेरणादायक रहा हैं. इस लेख में हम 5 ऐसी चीज़ जानेगे, जो सिर्फ धोनी जैसे नि:स्वार्थ क्रिकेटर ही कर सकते हैं:-

1) बेटी के जन्म के दौरान भारतीय टीम के साथ
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इस व्यक्ति के जीवन में पहली बार पिता बनना सबसे ख़ास क्षणों में से एक होता हैं. इस यादगार क्षण के दौरान सभी पिता अपने बच्चे के साथ रहना चाहते हैं. लेकिन धोनी इस खास क्षण को अपने बच्चे के साथ रहकर महसूस नहीं कर पायें.

धोनी की बेटी जीवा का जन्म 2015 में हुआ, इस दौरान तत्कालीन भारतीय कप्तान एमएस धोनी विश्वकप 2015 के लिए ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे. पिता बनने के ख़बर मिलने के बाद धोनी को भारतीय टीम और अपनी बेटी के साथ समय बिताने में से एक को चुनना था. तब धोनी ने कहा था, कि मेरे लिए देश सबसे पहले है. बेटी के साथ समय बिताने के लिए उनके पास आगे काफ़ी समय होगा.

2) ट्राफी जीतने के बाद युवायों को ट्राफी देना


धोनी ने बारे में एक ख़ास पहलु यह भी है, कि धोनी ट्राफी जीतने के बाद युवाओ को ट्राफी देकर ख़ुद साइड(दूर) में हो जाते हैं. जब भी भारत या सीएसके ने ट्रॉफी जीती, तो धोनी को ट्राफी दी गई, क्योंकि वह कप्तान हैं. हालाँकि इसके बाद धोनी टीम के युवा खिलाडियों को ट्राफी देकर ख़ुद दूर हो जाते हैं.

यह धोनी की ख़ास बात है, कि वह प्रसिद्धी के लिए नहीं खेलते है. वह हमेशा टीम का महत्वपूर्ण समझते हैं.

3) साथी खिलाडियों को विनिंग रन का मौका देना
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पिछले कुछ वर्षो में देखा गया है, कि धोनी अकसर टीम के अन्य खिलाडियों को विनिंग रन बनाने का मौका देते हैं. हाल में धोनी ने विराट कोहली और युवा बल्लेबाज़ मनीष पाण्डेय को यह अवसर दिए हैं.

धोनी का मानना है, कि जिस खिलाड़ी ने टीम की जीत में ज्यादा योगदान दिया है, उस खिलाड़ी को विनिंग रन बनाने का मौका मिला मिलना चाहिए. धोनी की यह सोच उनके नि:स्वार्थ स्वाभाव को दर्शाती हैं.

4) हमेशा टीम के बारे में सोचना

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जब धोनी ने टेस्ट क्रिकेट की कप्तानी छोड़कर संन्यास लिया, तब उनपर किसी प्रकार का कोई दवाब नहीं था. बतौर कप्तान उनकी बल्लेबाज़ी औसत साधारण होने के बावजूद वह अब भारत के सर्वश्रेठ विकेटकीपर हैं. यह चाहते तो भारत के लिए कुछ वर्षो तक क्रिकेट खेल सकते थे.

हालाँकि धोनी अपनी शर्तो पर टेस्ट क्रिकेट छोड़ने का फ़ैसला लिया, क्यूंकि वह जानते थे, कि यह सही समय हैं. यहाँ तक की धोनी ने सिमित ओवर क्रिकेट की कप्तानी में अचानक छोड़ी, क्यूंकि वह जानते थे, कि कोहली का कप्तान बनाने का यह सही मौका हैं, और उन्हें अब अपनी बल्लेबाज़ी पर ज्यादा ध्यान केन्द्रित करने की जरूरत हैं.

5) ख़ुद जिम्मेदारी लेना
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पूर्व भारतीय कप्तान एमएस धोनी ने बतौर बल्लेबाज़ और कप्तान अपने करियर में कई कठिन फ़ैसले लिए हैं. टी-ट्वेंटी विश्व कप 2007 के फाइनल में अंतिम ओवर जोगिंदर शर्मा को देना हो या आईसीसी विश्वकप 2011 में ख़ुद को बल्लेबाज़ी में प्रोमोट करने का फ़ैसला हो, धोनी कभी भी कड़े फ़ैसले लेने से हिचके नहीं हैं.

टीम सीनियर खिलाड़ियो को ख़राब फ़ील्डिंग के कारण आराम देने के फ़ैसले के कारण धोनी को आलोचना का भी शिकार होना पड़ा, हालाँकि अब इस फ़ैसले के कारण फ़ील्डिंग स्तर में सुधार के लिए धोनी को श्रेय दिया जाता हैं. कई बार धोनी के फ़ैसले टीम के पक्ष में नहीं गए है, जिस दौरान धोनी ने ख़ुद आगे से आकर जिम्मेदारी ली हैं.

टी-ट्वेंटी 2007 फाइनल के बाद जोगिंदर शर्मा ने कहा, कि उन्हें धोनी ने बोला था, कि तू सिर्फ गेंद डाल, अगर हम हारे तो जिम्मेदारी मेरी होगी. युवा खिलाडियों पर धोनी का यह भरोसा हमेशा टीम के काम आता हैं.