भारतीय युवा आल-राउंडर हार्दिक पंड्या वतर्मान में दुनिया के सबसे उभरते हुए स्टार हैं. पंड्या सिमित ओवर क्रिकेट में लम्बे-लम्बे छक्के मारने के लिए अकसर जाने जाते हैं. भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जा रही 5 मैचो की वनडे सीरीज के तीसरे मैच में भी पंड्या ने 4 तूफ़ानी छक्को की मदद से शानदार 78 रनों की पारी खेलकर भारत को मैच 5 विकेट से जिताया.

भारतीय ऑलराउंडर और लंबे शॉट खेलने की अपनी विशिष्ट क्षमता के कारण तेजी से एक खास पहचान बना रहे हार्दिक पंड्या ने खुलासा किया कि छक्के जड़ना उनके बचपन का शगल रहा है...

युवा हार्दिक पंड्या ने अपने छोटे से अंतराष्ट्रीय क्रिकेट करियर के दौरान 4 बार छक्को की हैट्रिक लगाई हैं. तीसरे वनडे के बाद प्रेस कांफ्रेंस के दौरान पंड्या ने कहा, “क्रिकेट में मैं छक्के तो पहले भी मारता था, अब सिर्फ अंतर यह है, कि अब मैं क्रिकेट के उच्च स्तर पर छक्के मार रहा हूँ. दरअसल मैं बचपन से ही छक्के लगा रहा हूँ. क्रिकेट प्रसंशको को ऐसा लगता होगा, कि पाकिस्तान के विरुद्ध आईसीसी चैंपियंस ट्राफी के बाद मेरा बदला, इससे मुझे परेशानी नहीं हैं.”

23 वर्षीय पंड्या ने अब तक 28 अंतराष्ट्रीय पारियों में 40 छक्के लगायें हैं.

हार्दिक पंड्या से पूछा गया, कि क्या पाकिस्तान के विरुद्ध आईसीसी चैंपियंस ट्राफी में खेली गयी 76 रनों की पारी के बाद उनके करियर में बदलाव आया?, जिसपर पंड्या ने बताया,

“आईसीसी चैंपियंस ट्राफी से पहले आईपीएल में मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा हैं, हालाँकि इससे पिछले सीजन में मैं कुछ ख़ास नहीं कर पाया था, लेकिन मैंने कड़ी मेहनत की और शानदार वापसी की. मैं हमेशा ख़ुद को प्रेरित करने पर विश्वास रखता हूँ, जोकि काफ़ी महत्वपूर्ण हैं.
क्रिकेट के खेल में में आत्मविश्वास हमेशा महत्वपूर्ण होता है और मुझे खुद पर विश्वास है, कि मैं गेंद को मैदान के बाहर मार सकता हूँ.”

आईसीसी चैंपियंस ट्राफी 2017 के दौरान पंड्या ने पाकिस्तान के विरुद्ध खेले गए दोनों मैचो में छक्को की हैट्रिक लगाई थी.

पंड्या से पूछा गया, कि क्या मैदान पर बड़े शॉट खेलना उनकी नेचुरल कला है?

जवाब में पंड्या ने कहा, “यह सिर्फ हार्ड हिटिंग से सम्बंधित नहीं हैं. खेल को समझना सबसे अहम होता हैं. ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध जब जैम्पा गेंदबाजी कर रहा था, तब मुझे यकीन था, कि मैं इसे छक्के मार सकता हूँ, इसके बावजूद मैंने स्तिथि की नजाकत को समझते हुए उसके 7वे ओवर तक का इंतज़ार किया. पहले वनडे में इस एक ओवर में मैच के समीकरण बदल दिए थे.”

“यह सकारात्मक सोच और खुद पर आत्मविश्वास से जुड़ा है. यदि मुझे लगता है, कि छक्के लगाना चाहिए तो मैं खेल की स्तिथि को समझता हूँ और फिर बड़े शाट खेलता हूँ.”