पिछले कुछ समय से एक दलील दी जा रही है, कि विराट कोहली के कप्तान बनाये जाने के बाद से भारतीय टीम में रॉयल चैलेंजरर्स बैंगलोर(आरसीबी) के खिलाडियों की अधिकता काफ़ी देखने को मिली हैं. उनका मतलब है, कि अश्विन और जडेजा सहित टीम में सीनियर खिलाड़ियों को टीम में जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा है. इन खिलाडियों को आराम के नाम पर टीम से बाहर कर दिया गया हैं.

दरअसल यह स्पष्ट रूप से कई पूर्व खिलाड़ियों और अन्य क्रिकेट पंडितों के बीच बहस का विषय बन गया है. इसमें कोई दोहराए नहीं है, कि विराट कोहली अपने फ़ेवरेट खिलाडी को टीम में जगह देने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं.

खिलाडियों का अच्छा प्रदर्शन
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युज्वेन्द्र चहल और केदार जाधव ने मजबूत प्रदर्शन से साबित किया है, कि दोनों टीम में जगह बनाने के लिए योग्य हैं. हालाँकि के.एल राहुल ने कुछ खास नहीं किया हैं. राहुल टेस्ट क्रिकेट में जगह की हक़दार हैं, जबकि सिमित ओवर क्रिकेट में उनकी फॉर्म और जगह दोनों अस्थाई हैं. आईपीएल में विराट कोहली की टीम में खेलने के कारण कई लोगों को लगता है, कि वह बिना किसी प्रदर्शन के भारतीय टीम में बनाये हुए हैं.

चहल और केदार ने अपने प्रदर्शन से कप्तान के भरोसे को साबित किया हैं. श्रीलंका सीरीज के दौरान चहल ने कई अहम मौको पर बड़े विकेट लिए, जबकि केदार ने भी अंतिम वनडे में एक महत्वपूर्ण अर्धशतक लगाया, इसके आलावा केदार के स्पिन गेंदबाजी हमेशा टीम के काम आती हैं.

ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध खेले गए पहले वनडे में युज्वेन्द्र चहल टीम के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज़ रहे थे. चहल ने मैच में मैक्सवेल के अहम विकेट सहित कुल 3 विकेट हासिल किये थे, जबकि केदार जाधव ने भी मैच में 40 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली थी.

धोनी से समानताएं
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यहां तक ​​कि जब एमएस धोनी आईपीएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान थे,  तब भी भारतीय टीम में रविन्द्र जडेजा, सुरेश रैना, अश्विन, विजय और मोहित शर्मा जैसे कई फ्रेंचाइजी खिलाडी एक साथ खेलते रहे. इस दौरान कुछ खिलाड़ियों का करियर बेहद सफल रहा और वह खिलाड़ी अब भी टीम के महत्वपूर्ण हिस्सा हैं.