भारतीय क्रिकेट टीम ने पिछले एक दशक में बेहद ही शानदार प्रदर्शन किया है, और कई बड़ी ट्राफी भी जीती हैं. टीम के अच्छे प्रदर्शन का श्रेय कही न कही चयनकर्ताओ को भी जाता है, जिन्होंने अच्छे प्रदर्शन के लिए कई अहम और बड़े फ़ैसले लिये. इस लेख में हम पिछले एक दशक में चयनकर्ताओ द्वारा लिए गए 5 बड़े फैसलों को बारे में जानेगे:-

i) धोनी को कप्तान बनाना
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एमएस धोनी को भारतीय टीम का कप्तान बनाया जाना यक़ीनन चयनकर्ताओं द्वारा लिए गया सबसे बड़ा निर्णय था. जिसके बाद से धोनी भारत के सबसे महानतम बल्लेबाज़ और कप्तान के रूप में निखरकर आये.

धोनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने सबसे ज्यादा उपलब्धियां हासिल की. जिसमे टेस्ट क्रिकेट में नंबर एक रैंक सहित आईसीसी द्वारा आयोजित सभी तीनो ट्राफी शामिल हैं.

ii) लीजेंड खिलाडियों के अच्छे विकल्प तलाशे
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भारतीय की मजबूत बल्लेबाज़ी हमेशा से टीम की ताकत रही हैं. टीम में सचिन, गांगुली, लक्ष्मण, द्रविड़ और सहवाग के साथ अनिल कुंबले जैसे बड़े दिग्गज खिलाडियों की विरासत को युवा खिलाडियों ने बख़ूबी से निभाया हैं.

भारतीय टीम में मौजूदा समय में कोहली, पुजारा, रहाणे, धवन, रोहित, अश्विन और जडेजा इन सभी खिलाडियों ने महान खिलाड़ियो की कमी को महसूस नहीं होने दिया हैं. इन्ही युवा खिलाडियों की कड़ी मेहनत को शानदार प्रदर्शन की मदद से आज भारत विश्व की नंबर एक टेस्ट टीम भी हैं.

iii) युवाओं को मौका देना
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भारतीय युवा खिलाडियों की प्रतिभा की पहचान करके उन्हें मौके देने में चयनकर्ता ने बेहद अच्छा काम किया हैं. इसका सबसे अच्छा उदहारण विराट कोहली हैं. भारतीय चयनकर्ता ने आईसीसी विश्वकप 2011 में धोनी और युवराज सिंह से पहले विराट कोहली को नंबर 4 बल्लेबाज़ी कराने का बड़ा और अहम फ़ैसला लिया. जिस तरह से भारतीय चयनकर्ताओं और महेंद्र सिंह धोनी ने अपने शुरुआती दिनों में कोहली का समर्थन किया, उन्होंने उन्हें बहुत आत्मविश्वास दिया और अब वह खेल के सभी तीन प्रारूपों में, विश्व के सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज हैं.

पिछले कुछ सालों में, हमने देखा है कि हार्दिक पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, जसप्रीत बुमराह और केएल राहुल जैसे युवा खिलाडियों पर कप्तान कोहली और चयनकर्ताओ ने काफ़ी भरोसा जताया हैं.

iv) फिटनेस पर जोर दिया
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जब धोनी को टीम का कप्तान बनाया गया, तब उन्होंने टीम के खिलाडियों की फिटनेस पर काफ़ी ध्यान दिया, जोकि टीम के सफलता के महत्वपूर्ण कारक भी बना. धोनी के इस फ़ैसले पर चयनकर्ता ने अपनी सहमति में जताई और, यह यही कारण है, कि भारतीय फील्डिंग को आज दुनिया में सर्वश्रेष्ठ में से एक माना जाता है.

टीम में फ़िटनेस स्तर को बढाने के खिलाडियों के प्रदर्शन में भी काफ़ी अच्छा प्रभाव पड़ा हैं. चयनकर्ता अब खिलाड़ी की फॉर्म के साथ-साथ खिलाड़ी की फ़िटनेस पर भगी अधिक ध्यान देते हैं.

v) भारत की ‘बी’ बनाना
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भारत में प्रतिभाशाली खिलाडियों की कमी नहीं हैं, लेकिन दुर्भाग्य से सभी खिलाड़ी अपने देश के प्रतिनिधित्व करने के सपने को साकार नहीं पाते हैं, और उनका करियर बर्बाद हो जाता हैं. हालांकि, चयनकर्ताओं ने ज़िम्बाब्वे जैसे कमजोर दौरे के लिए बी टीम बनाई है, जिससे इन खिलाड़ियों को आवश्यक आत्मविश्वास और अनुभव हासिल करने में मदद मिले.

के.एल राहुल, मनीष पाण्डेय और हार्दिक पंड्या जैसे युवा भारतीय खिलाडियों को इन्हें दौरे पर जाकर आत्मविश्वास हासिल हुआ और आज यह युवा खिलाड़ी भारतीय टीम के प्रमुख सदस्य हैं.