भारत के युवा आल-राउंडर हार्दिक पंड्या मौजूदा समय में अपने क्रिकेट करियर के उच्च पढाव पर हैं. आईपीएल में शानदार प्रदर्शन करते हुए मुंबई इंडियंस टीम को तीसरा ख़िताब जिताने के बाद से हार्दिक पंड्या अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट में लगातार ऊँचाईयां छू रहे हैं.

आईसीसी चैंपियंस ट्राफी 2017 के फाइनल में पाकिस्तान के विरुद्ध उनकी तूफ़ानी बल्लेबाज़ी के बाद विश्व भर के क्रिकेट पंडितो ने उनकी जमके तारीफ़ की. एकदिवसीय क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करने के बाद पंड्या को श्रीलंका के विरुद्ध टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण का मौका मिला. मौजूदा समय में पंड्या टीम के सबसे होनहार और प्रतिभाशाली खिलाडियों में शामिल है, हालाँकि यहाँ तक का उनका सफ़र आसान नहीं रहा हैं.
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विक्रम सथाये के शो ‘व्हट द डक’ में हार्दिक पंड्या ने अपने संघर्ष के दिनों में खुलके बात की. पंड्या ने बताया अंडर-19 के दिनों में वह सिर्फ मैगी खाकर खेलने जाते थे. पंड्या ने यह भी बताया, कि उनके परिवार की वित्तीय स्थिति सही नहीं थी, जिसके कारण उन्हें समृद्ध और स्वस्थ आहार प्रदान नहीं किया जा सका.

हार्दिक पंड्या ने बताया, “अंडर-19 के दौरान मैं शुबह और शाम दोनों टाइम मैगी खाता था. मैं मैगी काफ़ी पसंद करता हूँ, और स्तिथि भी यही थी. वित्तीय परेशानी के कारण बढ़िया डाइट बनाये रखना काफ़ी मुश्किल था. अब मैं जो चाहे वो खा सकता हूँ, लेकिन उस समय परिवार में काफ़ी समस्याएं थी, खासतौर पर वित्तीय समस्याएं.”
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हार्दिक ने बताया, मैंने और मेरे भाई कुणाल पंड्या ने शुरुआती दिनों में बरौडा क्रिकेट एसोसिएशन से क्रिकेट किट उधार की थी. हालाँकि इस दौरान हमने अपनी सभी सेविंग(बचत) से एक कार ख़रीदी थी, जिसके बाद कई लोगों ने हमारे पर उंगलियाँ भी उठायी थी.

हार्दिक ने कहा, “बहुत से लोगों को इसके बारे में पता नहीं है हमने एक कार खरीदी थी लेकिन इसके बाद कोई बचत नहीं बची थी, जहाँ भी मैं और कुणाल मैच खेलने के लिए जाते थे, हम कार में जाते थे. हमें एक वर्ष के लिए बड़ौदा क्रिकेट संघ (बीसीए) से क्रिकेट उधार किट लेना पड़ा. मैं 17 साल का था और कुणाल शायद लगभग 19. कई लोग पूछते हैं, कि हम एक कार में आ रहे हैं लेकिन क्रिकेट किट बर्दाश्त नहीं कर सकते?
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उन्होंने आगे बताया, पिताजी का स्वास्थ्य परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय था. पिताजी को एक से अधिक बार हार्ट अटैक आ चूका था और वित्तीय समस्या के कारण उन्हें हॉस्पिटल ले जाने में असमर्थ थे. परिवार के सभी सदस्यों की आय ईएमआई में खर्च हो जाती थी.

हार्दिक ने बताया, “हम बहुत ज्यादा आश्वस्त थे, कि हम कभी से भी सहानुभूति स्वीकार नहीं करेंगे, चाहे जो भी हो.”   

“मेरे पिताजी घर पर एकमात्र कमाई करने वाले थे. उन्हें एक रात में ही एक नहीं बल्कि दो बार दिल का दौरा पड़ा. लगभग छह महीने बाद उन्हें अटैक पड़ा, लेकिन हम खुश थे, कि हम उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे. उस समय से हमारी वित्तीय समस्याएं शुरू हुईं. हमारे पास कोई बचत नहीं थी और शायद हमने जितना कमाया था उससे ज्यादा खर्च किया.”
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हार्दिक ने बताया, आईपीएल में पदार्पण के बाद ही उनके संघर्ष के दिन खत्म हुए. पंड्या ने बताया, उनके अनुसार, पेट्रोल की लीटर सहित कुछ भी खरीदने में उन्हें गणना करना पड़ता था. उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने प्रत्येक मैच में 400 रुपये कमाए, जबकि कुणाल ने उनसे 100 ज्यादा कमाए.

पंड्या ने बताया, “हम खेलने के लिए विभिन्न गांवों में जाते थे कुणाल को अधिक पैसे मिलते, उन्हें मैच के लिए 500 रुपये मिलते थे और मुझे 400 रुपये, लेकिन हम हमेशा कार में यात्रा करते थे. आत्म-सम्मान (हंसते हुए) से बड़ा जीवन में कुछ भी बड़ा नहीं है. हम एक पेट्रोल पंप पर जाकर बोतलों में दो लीटर पेट्रोल खरीदते थे, जबकि बैकअप के रूप में दुसरे बोटल में दो लीटर पेट्रोल थे. आईपीएल से छः महीने पहले तक यही हमारी कहानी थी.”